बस्तर में मोदी की हुंकार: नक्सलवाद के खिलाफ दशकों की लड़ाई में देश की ऐतिहासिक जीत
दीपावली पर जवानों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री, बोले—यह पहली दिवाली जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त

नरेंद्र सिंह भदौरिया,संवाददाता
द क्लिफ़ न्यूज़ | बस्तर, छत्तीसगढ़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दीपावली के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के बीच पहुंचकर नक्सलवाद के खिलाफ दशकों से चल रहे अभियान की सफलता को देश की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। बस्तर जिले के करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) ऑपरेशंस बेस पर जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की दीपावली विशेष महत्व रखती है, क्योंकि देश ने नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के विरुद्ध लंबी लड़ाई में निर्णायक सफलता प्राप्त की है। उन्होंने दावा किया कि देश का प्रत्येक जिला अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है और करोड़ों नागरिक उस भय से बाहर निकल रहे हैं, जिसने दशकों तक उनके जीवन, सुरक्षा और विकास को प्रभावित किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देशभर में लोग अपने परिवारों के साथ दीपावली का उत्सव मना रहे हैं, तब उन्होंने उन जवानों के बीच आने का निर्णय लिया है, जो देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए निरंतर समर्पित रहते हैं। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को अपना परिवार बताते हुए कहा कि बस्तर की धरती पर दीपावली मनाना उनके लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, जिस क्षेत्र में कभी नक्सलवाद का भय और हिंसा का प्रभाव था, वहां अब शांति, सुरक्षा और विकास की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।
40-50 वर्षों के संघर्ष के बाद बदली परिस्थितियां
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक हिंसा, असुरक्षा और विकास में बाधाओं का सामना किया। एक समय देश के लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सली गतिविधियों से प्रभावित थे। इनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्र शामिल थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण सुरक्षा बलों के जवानों के साथ बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ी। गांवों में भय का वातावरण बना रहा और दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं तथा बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने में कठिनाइयां आईं।
उन्होंने कहा कि 40-50 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद देश ऐसी दीपावली मना रहा है, जब नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री ने इसका श्रेय सुरक्षा बलों के साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को दिया।
सुरक्षा बलों को निर्णायक कार्रवाई की स्वतंत्रता दी: मोदी
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद सुरक्षा नीति और अभियान संचालन में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने सुरक्षा बलों को आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी और नक्सलवाद के उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया।
मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि नक्सलवाद को लंबे समय तक ऐसी समस्या मान लिया गया था, जिसका समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस धारणा को बदलने का प्रयास किया और सुरक्षा बलों को स्पष्ट लक्ष्य के साथ काम करने का अवसर दिया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में शासन की पहुंच बढ़ाने, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने तथा स्थानीय नागरिकों का विश्वास हासिल करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि अभियान केवल सशस्त्र कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका उद्देश्य प्रभावित समाज को हिंसा और भय से मुक्त करना भी था।
47 वर्षों में पहली बार सीआरपीएफ की बड़ी उपलब्धि का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में सीआरपीएफ के किसी जवान की ड्यूटी के दौरान जान नहीं गई और 47 वर्षों के संदर्भ में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, इंडिया रिजर्व बटालियन, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स और विशेष सुरक्षा इकाइयों के योगदान की सराहना की। महिला कमांडो के साहस और सेवा का भी विशेष उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और जोखिमपूर्ण अभियानों के बीच सुरक्षा बलों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए लगातार काम किया। उन्होंने इस सफलता को जवानों के सामूहिक प्रयासों और राष्ट्रीय संकल्प का परिणाम बताया।
बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास को नई प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने से बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन इलाकों में कभी हिंसा और असुरक्षा के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होता था, वहां अब सड़क, बिजली, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने का वातावरण बन रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हिंसक गतिविधियों को समाप्त करना नहीं, बल्कि दशकों तक विकास से वंचित रहे नागरिकों को बेहतर जीवन प्रदान करना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। शांति स्थापित होने से सरकारी संस्थाओं की पहुंच बढ़ती है और नागरिकों को शिक्षा, चिकित्सा तथा आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
बस्तर में बदलाव के संदर्भ में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी को भी सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
गरीबी उन्मूलन को भी सरकार की उपलब्धि बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ देश में गरीबी कम करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में लगभग 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, मुफ्त खाद्यान्न वितरण और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने गरीब परिवारों को बुनियादी सुरक्षा और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी है, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और जनकल्याण को एक व्यापक विकास नीति के महत्वपूर्ण अंगों के रूप में प्रस्तुत किया।
हालांकि, गरीबी में कमी संबंधी 50 करोड़ का आंकड़ा प्रधानमंत्री के संबोधन में किया गया दावा है। इसके स्वतंत्र आकलन के लिए संबंधित रिपोर्ट की समयावधि और गरीबी मापने के मानकों का परीक्षण आवश्यक है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया प्रधानमंत्री का स्वागत
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बस्तर आगमन का स्वागत किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में मिली सफलता को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
बस्तर लंबे समय तक देश में माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। यहां सुरक्षा बलों की तैनाती, लगातार अभियानों, आत्मसमर्पण और प्रशासनिक पहुंच के विस्तार ने क्षेत्र की सुरक्षा परिस्थितियों में बदलाव लाने में भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री का करनपुर स्थित सीआरपीएफ परिसर में जवानों के साथ दीपावली मनाना इसी बदलती परिस्थिति और सुरक्षा बलों के योगदान को रेखांकित करने वाला कार्यक्रम रहा।
अब शांति को स्थायी विकास में बदलने की चुनौती
बस्तर में प्रधानमंत्री का संबोधन राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ आदिवासी क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य से भी जुड़ा रहा। नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनौती दूरस्थ गांवों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल और आजीविका के स्थायी अवसर पहुंचाने की है।
इसके साथ ही स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकारों, वन संसाधनों पर उनकी निर्भरता, सांस्कृतिक पहचान और विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। सुरक्षा संबंधी उपलब्धियों को स्थायी शांति में बदलने के लिए प्रशासन और स्थानीय समाज के बीच विश्वास बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सुरक्षा बलों के बलिदान को सम्मान देते हुए देश के विकास और शांति के संकल्प को दोहराया। सरकार ने नक्सलवाद से मुक्ति का दावा किया है, लेकिन इस उपलब्धि की स्थायित्व संबंधी वास्तविक परीक्षा आने वाले वर्षों में क्षेत्र की सुरक्षा, नागरिक अधिकारों और विकास के परिणामों से होगी।
इस प्रकार बस्तर में दीपावली के अवसर पर दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन नक्सलवाद के विरुद्ध सरकार की उपलब्धियों, सुरक्षा बलों के योगदान और हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के भविष्य को केंद्र में रखने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संदेश रहा।
