12 दिन बाद मिली लापता सिविल जज अभ्यर्थी अर्चना तिवारी, उत्तर प्रदेश में नेपाल बॉर्डर के पास हुई बरामद

12 दिन से लापता सिविल जज अभ्यर्थी अर्चना तिवारी (28) को अंततः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले, नेपाल बॉर्डर के नज़दीक से खोज लिया गया। सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने मंगलवार देर रात बताया कि अर्चना को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और टीम उन्हें लेकर भोपाल लौट रही है।

अर्चना 7 अगस्त को इंदौर से कटनी जाने वाली नर्मदा एक्सप्रेस से सफर के दौरान लापता हो गई थीं। इस दौरान उनकी तलाश में जीआरपी, आरपीएफ, स्थानीय पुलिस, वन विभाग और परिवार के लोग जुटे रहे। कई जिलों और रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी किए गए, वहीं सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें और जानकारी लगातार साझा की जाती रही।

खोज में जुटी पुलिस टीम
जांच के दौरान पुलिस ने बी-3 कोच के 50 से अधिक यात्रियों से पूछताछ की, जिनमें अर्चना आखिरी बार देखी गई थीं। इंदौर–कटनी रूट के विभिन्न स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। साइबर टीम ने मोबाइल डेटा और ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक किया। आठ अधिकारियों ने डिजिटल सबूतों और सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहराई से जांच की।

अर्चना के नर्मदा नदी में गिरने की आशंका पर गोताखोरों तक को लगाया गया था। लेकिन लगातार खोज और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद आखिरकार उन्हें उत्तर प्रदेश में सुरक्षित ढूंढ निकाला गया।

परिवार को मिली राहत
एसपी लोढ़ा ने पुष्टि की कि अर्चना पूरी तरह सुरक्षित और सकुशल हैं। उनके परिजन 12 दिन की चिंता और तनाव के बाद अब राहत की सांस ले पाए हैं।

ग्वालियर के कांस्टेबल का कोई हाथ नहीं
इस बीच, जीआरपी एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने ग्वालियर पुलिसकर्मी राम तोमर की संलिप्तता की संभावना से इनकार किया। तोमर ने अर्चना का ट्रेन टिकट बुक करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन जांच में उनके संपर्क या अर्चना की गुमशुदगी में शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले।

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