मध्यप्रदेश में 2026 तक 60 लाख टन ‘लीगेसी वेस्ट’ हटाने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 109 शहरों से लगभग 60 लाख टन पुराने (लीगेसी) कचरे को जनवरी 2026 तक पूरी तरह समाप्त करना है। इसके लिए सरकार ने 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साथ ही 49 जिलों में सैनिटरी लैंडफिल साइट्स बनाई जाएंगी, जहाँ अपशिष्ट कचरे (Inert Waste) का निपटान किया जाएगा।

स्वच्छ-एमपी अभियान की शुरुआत

शहरी प्रशासन एवं विकास (UAD) संचालनालय ने ‘SWACHH-MP अभियान (Society Working Actively for Cleaner and Healthier Habitats in MP)’ के तहत यह व्यापक कचरा प्रबंधन अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, 109 में से 103 शहरों में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही कचरा साफ करने का काम शुरू होगा।

पांच प्रमुख बिंदुओं पर फोकस

  1. लीगेसी वेस्ट की सफाई
  2. दैनिक घरेलू कचरे का प्रबंधन
  3. सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू करना
  4. बल्क वेस्ट जनरेटर्स पर सख्ती
  5. जनजागरूकता अभियान

अब तक की प्रगति

अब तक 37 छोटे शहरों जैसे हरदा, पन्ना, मुलताई, रीवा, बालाघाट, मंडला, अलीराजपुर और नैनपुर ने अपने लीगेसी वेस्ट को पूरी तरह साफ कर दिया है। लगभग 30 अन्य शहरों ने 70% तक सफाई का काम पूरा कर लिया है। इंदौर शहर ने पहले ही अपने लीगेसी वेस्ट का सफलतापूर्वक बायो-रिमेडिएशन प्रोजेक्ट के जरिए निपटान कर दिया है।

बायो-रिमेडिएशन और बायो-माइनिंग

पुराने डंपिंग ग्राउंड और 10-12 साल पुराने कचरे के ढेर को बायो-रिमेडिएशन और बायो-माइनिंग प्रक्रिया से हटाया जाएगा। सरकार ने निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 तक पूरी होनी चाहिए। सफाई पूरी होने के बाद नगर निगम आयुक्त प्रमाणपत्र जारी करेंगे।

इनर्ट वेस्ट क्या है?

इनर्ट वेस्ट ऐसा कचरा होता है जो न तो रासायनिक और न ही जैविक रूप से प्रतिक्रिया करता है तथा बहुत धीरे-धीरे या बिल्कुल भी नहीं सड़ता। इसमें रेत, कंक्रीट, और डेमोलिशन वेस्ट शामिल हैं। इसका निपटान सैनिटरी लैंडफिल्स में किया जाएगा।

बड़ी चुनौतियां

  • ग्वालियर : 6.03 लाख टन
  • भोपाल : 4.5 लाख टन
  • जबलपुर : 3.03 लाख टन
  • उज्जैन : 47,000 टन

फंड का वितरण (जनसंख्या अनुसार)

  • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर: केंद्र 25%, राज्य 25%, ULB 50%
  • 1-10 लाख आबादी वाले शहर: केंद्र 33%, राज्य 33%, ULB 34%
  • 10 लाख से कम आबादी वाले शहर: केंद्र 50%, राज्य 40%, ULB 10%

दीर्घकालिक लाभ

शहरी प्रशासन के अतिरिक्त आयुक्त परिक्षित संजयराव ज़ाडे ने बताया कि यह मिशन न केवल शहरों को पुराने कचरे से मुक्त करेगा बल्कि वैज्ञानिक और सतत अपशिष्ट प्रबंधन को भी सुनिश्चित करेगा। उनके अनुसार, यह परियोजना लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ देगी और प्रदेश में शहरी स्वच्छता मानकों को ऊँचा उठाएगी।

Switch Language »