मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नर्सिंग कॉलेज “घोटाले” से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच के सदस्य जस्टिस अतुल श्रीधरन ने मंगलवार को खुद को इस मामले से अलग कर लिया। उन्होंने बताया कि उनका स्थानांतरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हो चुका है, इसलिए मुख्य न्यायाधीश से नई बेंच गठित करने का अनुरोध किया है।
यह जनहित याचिका (PIL) लॉ स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में भारी अनियमितताएं की हैं। दर्जनों कॉलेज बिना आवश्यक संसाधनों और स्टाफ के केवल कागज़ों पर ही संचालित हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदेशभर के सभी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता की जांच सीबीआई से करवाई। जांच में कॉलेजों को तीन श्रेणियों में बांटा गया—
- संचालन योग्य,
- संचालन अयोग्य,
- आवश्यक सुधारों के बाद संचालन योग्य।
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता ने एक अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद ‘अयोग्य’ कॉलेजों के छात्रों को ‘योग्य’ कॉलेजों में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है।
इस पर एमपी नर्सिंग काउंसिल का तर्क था कि छात्रों को केवल उसी जिले के किसी अन्य कॉलेज में ही स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने नियम को शिथिल करते हुए कहा कि छात्रों के हित में उन्हें अन्य जिलों के कॉलेजों में भी स्थानांतरित किया जा सकता है।